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अनिल ने अचानक से रोना बंद कर दिया | |
एट | |
और इलेक्ट्रॉन में ॠणात्मक | |
गर्मियों में छाछ पीना क्यों है फायदेमंद | |
आर्थिक व्यवस्था कभी ऐसी न थी कि वे इतना धनसंचय करते | |
आ गए और सुरलोक सिधारे | |
आप उस रात कहाँ थे | |
ट्रेन चल पड़ी थी और मैन अपना एक कदम अपने सपनों की ओर बढ़ाया था | |
दे सकता हूँ और मैं यही करूँगा दादाजी बोले | |
दिल से दिल के तार तो जुड़े नहीं | |
आज तक उन्होंने इतनी बड़ी मछली नहीं देखी थी | |
और नीलम की क्रीड़ा शैलमालाएँ बन रही थीं | |
चंपा ने अपने दीपस्तंभ पर से देखा | |
इतनी ही देर में ऐसी कायापलट हो गयी कि | |
जरा हम भी तो देखें कि वह क्या वस्तु है | |
और भानुकुँवरि इसके लिए अवसर ढूँढ़ रही थी | |
अतिथिगृह भी काफी बड़ा | |
दीपिका पादुकोण के नाम एक और उपलब्धि बिजनेस ऑफ फैशन की लिस्ट में शामिल | |
इसके चलते अंग्रेज़ों ने उन्हें गिरफ़्तार कर लिया | |
वन | |
मगर दोनों तरफ यह आग अन्दर ही अन्दर सुलगती रही | |
जयपुर राजस्थान की राजधानी है | |
फिर उसके चेहरे पर व्यग्रता फैल गई और | |
क्षमा कीजिए | |
जब तक भारतीय अपने ही घर में ग़ुलाम हैं | |
संतोष और धैर्य में मगन चला जा रहा था | |
और इतने दिन तक सारे कागजपत्र अपने हाथ में थे | |
मीनू कैसा रहा तुम्हारा दिन और | |
इसलिए मैंने कुछ नहीं कहा | |
मुझे तुम्हारे साथ वक़्त बिताना अच्छा लगता है। | |
भीषण आँधी | |
फँसाने के लिए फैलाया गया था | |
वही कुंभकर्ण जो स़िर्फ सोना चाहता है | |
मुझे घबराहट होने लगी | |
नाविकों ने देखा | |
हो ख्वाहिशों से बात बात | |
मुझ पर कुछ उपकार करें | |
और जब गुस्सा और बढ़ जाता तो वह उन्हें मारते थे | |
गैरपेशेवर और अनैतिक है एआईटीएः सोमदेव देववर्मन | |
आप मेरे दादाजी को परेशान कर रहे हैं | |
ये बहुत डरावना और घृणास्पद है कि | |
ऊपर इमली के घने वृक्षों की छाया है | |
एक अंगुल जमीन न बचती | |
परम्परागत रूप से कोलम बनाने के लिए चावल के | |
आग बुझानेवाले पाँचों कर्मचारी काम में जुट चुके थे | |
इस फैसले ने अलगू और जुम्मन की दोस्ती की जड़ हिला दी | |
ऐसा मत करो बिना पानी के मछलियाँ मर जाएँगी उसने कहा | |
जन्नत से मुलाकात हो | |
बोलो न मुन्ना क्या सोचा तुमने | |
उसका विवाह हुए अभी कितने दिन हुए थे | |
इस कमीज़ को इस्त्री की ज़रूरत है। | |
के मुताबिक़ भारतीय नागरिक | |
इसके लिए आपको पूर्णमासी की रात्रि तक प्रतीक्षा करनी होगी पूर्णमासी की रात्रि को आप | |
जम्मू कश्मीर में आज खुलेंगे स्कूल श्रीनगर के डीसी बोलेहालात काबू में | |
तोड़कर उन्हें धीरेधीरे चबा रहा था | |
ज्ञान की ज्वाला मन की जगह बाहर दहक रही थी | |
वन | |
दिल पर जो बीतती थी | |
तो सारे छेद भरने में एक हज़ार से ज़्यादा रुपये लगेंगे | |
महानाविक बुधगुप्त की आज्ञा सिंधु की लहरें मानती हैं | |
वहां के स्थापत्य और किले अपने सौंदर्य और | |
टॉम ने अपनी टोपी उतारी। | |
और उनके अगुआ बने | |
मुझे लगता है मुझे लगता है | |
परंतु दो महाशय इस कारण रियायत करना चाहते थे कि | |
आया तूफ़ान धूल उड़ाए | |
तब मैं अवश्य चला जाऊँगा चंपा | |
फिर भी बन्दूक उठाके | |
सर मैं भी मॉडल का ही ऑडिशन देने आई हूं | |
किसान पहले थोड़ा घबराया | |
दादाजी सो रहे थे लेकिन यह सामान्य नींद नहीं थी | |
फाइव | |
आता ही होगा दिमाग उसका बड़ा तेज है और | |
उसके हाथ में सिर्फ कर्म करना है और वह अपना काम बखूबी करेगी | |
यह बहुत शान्त जगह थी | |
जब कुंभकर्ण दहाड़ता है | |
कोई आपस में गालीगलौज करते और कोई रोते थे | |
मैं सोचता हूँ मैं सोचता हूँ | |
जो अपने प्रसिद्ध किले और | |
दादाजी अब भी बेखबर सोये हुए थे | |
काका ने जवाब दिया | |
ऐसे में जब वह हलवाई की दुकान के पास से | |
तुम अस्वस्थ हो जाओगी सो रहो | |
मैं ऊँट की सवारी करूँगी लोकनृत्य और | |
दिनरात एक करके बड़ी ही लगन से उसने पढ़ाई की | |
जिन्होंने पाकिस्तान जाने के बजाय भारत | |
यहाँ बैठी हुई अभी तक दीप जला रही हो | |
जीप का दरवाज़ा ज़ोर से बंद किया | |
तो हमारा बैल खोल ले जाओ | |
पर मौके की जमीन नहीं मिलती | |
जया नीचे चली गई थी | |
नोटबंदी पुरानी दिल्ली के गोलचा सिनेमा में लगा ताला | |
ज़ीरो | |
ऐसा करने से आप उन्हें महत्व देते हैं | |
पर देहात का रास्ता बच्चों की आँख | |
मेरे बॉस हाँ नहीं कहेंगे। | |
पूछा मैं इस मामले में तुम्हारी क्या सहायता कर सकता हूँ दादाजी ने कहा | |
परेशान लोग उनके पास उनकी | |
उन्होंने बताया एक डॉक्टर के रूप में | |
बड़े यत्न से अभ्र्रक की मंजुषा में |
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